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लोचन धाय फोघायल हरि नहिं आयल रे....

लोचन धाय फोघायल हरि नहिं आयल रे !
सिव-सिव जिव नहिं जाय आस अरुझायल रे !१!

मन कर तहाँ उडि जाइ जहाँ हरि पाइअ रे !
पेम-परसमनि-पानि आनि उर लाइअ रे !२

सपनहु संगम पाओल रंग बढाओलरे !
से मोर बिहि विघटाओल निन्दओ हेराओल रे !३!

सुकवि विद्यापति गओल धनि धइरज धरु रे !
अचिरे मिलत तोर बालमु पुरत मनोरथ रे !४!

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