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कि कहब हे सखि रातुक बात...

कि कहब हे सखि रातुक बात !
मानक पइल कुबानिक हाथ !१!

काच कंचन नहि जानय मूल !
गुंजा रतन करय समतूल !२!

जे किछु कभु नहि कला रस जान !
नीर खीर दुहु करय समान !३!

तन्हि सएँ कइसन पिरिति रसाल !
बानर-कंठ कि सोतिय माल !४!

भनइ विद्यापति एह रस जान !
बानर-मुह कि सोभय पान !५!

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कि कहब हे सखि आजुक रंग...

कि कहब हे सखि आजुक रंग !
सपनहिं सूतल कुपुरुप संग !१!

बड सुपुक्ख बलि आयल घाइ !
सूति रहल मोर आंचर झंपाइ !१!

कांचुलि खोलि आंलिगल देल !
मोहि जगाय आपु जिंद गेल !२!

हे बिहि हे बिहि बड दुम देल !
से दुख हे सखि अबहु न गेल !३!

भनई विद्यापति एस रश इंद !
भेक कि जान कुसुम मकरंद !४!

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